शुक्रवार, 18 सितम्बर 2026
राष्ट्रीय

पुलिस वाले ने फोन से फोटो खींचकर चालान काट दिया — क्या यह वैध है?

ई-चालान के लिए कानून ने कुछ तय उपकरण बताए हैं, और नियम कहता है कि उन पर सरकारी मंजूरी का प्रमाणपत्र होना चाहिए। मई 2026 में एक अदालत ने निजी मोबाइल से कटे पाँच चालान रद्द कर दिए। पूरी बात, और चालान गलत लगे तो क्या करें।

फोन से फोटो खींचकर काटा गया ई-चालान वैध है या नहीं — Rule 167A — वार्तालाप

यह सवाल अकसर पूछा जाता है और इसका जवाब आधा-अधूरा ही मिलता है। तो पहले नियम में क्या लिखा है, वह देख लेते हैं।

कानून क्या कहता है

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136A इलेक्ट्रॉनिक निगरानी की अनुमति देती है। इसके तहत सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 11 अगस्त 2021 को अधिसूचना G.S.R. 575(E) जारी करके केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में नियम 167A जोड़ा।

सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार यह नियम बताता है कि कौन से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इस्तेमाल हो सकते हैं और उन्हें कहाँ लगाया जाएगा:

  • स्पीड कैमरा
  • CCTV कैमरा
  • स्पीड गन
  • बॉडी वियरेबल कैमरा (वर्दी पर लगा कैमरा)
  • डैशबोर्ड कैमरा
  • ANPR — नंबर प्लेट पहचानने वाला सिस्टम
  • वेट-इन-मोशन मशीन
  • और इसी तरह की तकनीक

ध्यान दीजिए — इस सूची में निजी मोबाइल फोन नहीं है। बॉडी वियरेबल कैमरा ज़रूर है, लेकिन वह वर्दी पर लगा सरकारी उपकरण होता है, किसी की जेब का फोन नहीं।

और एक शर्त, जो सबसे अहम है

नियम 167A के अनुसार चालान जारी करने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण के पास राज्य सरकार के नामित अधिकारी का हस्ताक्षरित अनुमोदन प्रमाणपत्र होना चाहिए, जो प्रमाणित करे कि उपकरण सही है और ठीक से काम कर रहा है।

यानी उपकरण सिर्फ सूची में होना काफी नहीं — उस पर सरकारी मंजूरी भी होनी चाहिए।

मई 2026 का अदालती फैसला

5 मई 2026 को श्रीनगर की विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट (ट्रैफिक) अदालत ने एक वाहन मालिक के पाँच ई-चालान रद्द कर दिए।

अदालत ने कहा कि ये चालान नियम 167A के अनुसार जारी नहीं हुए थे — ये अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से नहीं बने थे और इनमें ज़रूरी प्रक्रियागत सुरक्षा उपायों का पालन नहीं हुआ था।

अदालत की टिप्पणी थी कि एक निजी स्मार्टफोन, चाहे कितना भी आधुनिक हो, सिर्फ इसलिए नियम 167A का “निर्धारित उपकरण” नहीं बन जाता कि वह किसी पुलिस अधिकारी के पास है।

अदालत ने यह भी पाया कि कुछ चालान ऐसी जगहों पर “सिग्नल तोड़ने” के थे जहाँ कोई चालू ट्रैफिक सिग्नल था ही नहीं, और चालान के साथ लगी तस्वीरों में न सिग्नल दिख रहा था, न स्टॉप लाइन, न उल्लंघन।

पर यहाँ एक ज़रूरी बात समझ लीजिए

यह एक ट्रायल कोर्ट का फैसला है, हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का नहीं। इसका मतलब यह नहीं है कि आपका चालान अपने आप रद्द हो गया।

इसका मतलब यह है कि नियम 167A का पालन न होने पर चालान को अदालत में चुनौती दी जा सकती है — और उसी आधार पर चालान रद्द भी हुए हैं।

चालान को खुद से “अवैध” मानकर नज़रअंदाज़ करना गलत रास्ता है। सही रास्ता चुनौती देना है।

ई-चालान के साथ क्या-क्या होना चाहिए

नियम के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी हर चालान के साथ यह जानकारी होनी चाहिए:

  1. साफ फोटो — जिसमें उल्लंघन और नंबर प्लेट दोनों साफ दिखें
  2. इलेक्ट्रॉनिक उपकरण से ली गई माप
  3. अपराध की तारीख, समय और जगह
  4. अधिनियम की कौन सी धारा टूटी, उसका उल्लेख
  5. भारतीय साक्ष्य कानून की धारा 65B(4) का प्रमाणपत्र

आखिरी वाला बिंदु सबसे कम जाना जाता है। 65B प्रमाणपत्र वह दस्तावेज़ है जो इलेक्ट्रॉनिक सबूत को अदालत में मान्य बनाता है। इसके बिना डिजिटल सबूत की कानूनी हैसियत कमज़ोर पड़ जाती है।

अगर आपके चालान की फोटो में नंबर प्लेट ही साफ नहीं है, या जगह गलत लिखी है — तो ये चुनौती देने के ठोस आधार हैं।

मौके पर काटा गया चालान अलग बात है

यह फर्क साफ रखिए:

स्थिति क्या लागू
अधिकारी ने आपको रोककर मौके पर चालान काटा सामान्य प्रवर्तन — अधिकारी खुद मौजूद है, वही गवाह है
बाद में फोटो के आधार पर ई-चालान आया नियम 167A की शर्तें लागू होती हैं

यानी अगर कोई अधिकारी आपको रोकता है और सरकारी eChallan ऐप से चालान काटता है, तो वह अलग प्रक्रिया है। सवाल तब उठता है जब आपको बाद में एक फोटो के साथ चालान मिलता है।

अपना चालान कैसे देखें

आधिकारिक पोर्टल है echallan.parivahan.gov.in — यहाँ वाहन नंबर, चालान नंबर या ड्राइविंग लाइसेंस से चालान देखा जा सकता है।

चालान के साथ लगी फोटो ज़रूर खोलकर देखिए। यही सबसे ज़रूरी काम है — और यही ज़्यादातर लोग नहीं करते। देखिए कि:

  • गाड़ी सच में आपकी है?
  • नंबर प्लेट साफ पढ़ी जा रही है?
  • जो उल्लंघन लिखा है, वह फोटो में दिख रहा है?
  • तारीख, समय और जगह सही है?

नंबर प्लेट की गलत रीडिंग से दूसरे की गाड़ी का चालान आपके नाम आ जाना आम बात है।

चालान गलत लगे तो क्या करें

  1. सबूत इकट्ठा कीजिए — चालान की फोटो का स्क्रीनशॉट, और अपनी बात का सबूत (जैसे उस समय गाड़ी कहीं और थी)
  2. ट्रैफिक पुलिस के पास शिकायत — कई राज्यों में ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करने की सुविधा है
  3. वर्चुअल कोर्ट — ई-चालान वर्चुअल कोर्ट से जुड़े होते हैं, वहाँ ऑनलाइन पक्ष रखा जा सकता है
  4. लोक अदालत — समय-समय पर ट्रैफिक चालान के लिए विशेष लोक अदालतें लगती हैं, जहाँ मामले जल्दी निपटते हैं

बहुत बड़ी रकम या गंभीर मामला हो तो वकील से सलाह लीजिए — खासकर अगर आप नियम 167A के आधार पर चुनौती देना चाहते हैं।

चालान न भरने का नतीजा

नियम के अनुसार 90 दिन से ज़्यादा चालान बकाया रहने पर लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन अधिकारी आपके ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन रजिस्ट्रेशन से जुड़े आवेदन आगे नहीं बढ़ाएँगे।

परमिट, फिटनेस और टैक्स के आवेदन चलते रहते हैं, लेकिन DL और RC वाले काम अटक जाते हैं।

इसलिए चालान को यूँ ही छोड़ना ठीक नहीं। या तो भरिए, या विधिवत चुनौती दीजिए — पर लटकाइए मत।

एक चेतावनी

चालान के नाम पर ठगी बहुत बढ़ी है। SMS या व्हाट्सएप पर आया “चालान भरें” वाला लिंक लगभग हमेशा फर्जी होता है।

  • चालान हमेशा echallan.parivahan.gov.in या अपने राज्य के आधिकारिक पोर्टल से ही देखिए और भरिए
  • किसी लिंक पर कार्ड की जानकारी या OTP मत डालिए
  • ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर कॉल कीजिए — पूरी प्रक्रिया यहाँ है

स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB) — नियम 167A संबंधी अधिसूचना G.S.R. 575(E) दिनांक 11 अगस्त 2021, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय; केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 (नियम 167 एवं 167A) का प्रकाशित पाठ; मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136A; विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट (ट्रैफिक) श्रीनगर का 5 मई 2026 का आदेश — लाइव लॉ एवं अन्य विधि रिपोर्टिंग के अनुसार।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। श्रीनगर अदालत का आदेश एक ट्रायल कोर्ट का फैसला है और उसका असर हर मामले में अलग हो सकता है। अपने मामले के लिए योग्य वकील से परामर्श करें। नियम और प्रक्रिया समय-समय पर बदलते हैं — ताज़ा स्थिति के लिए parivahan.gov.in देखें। कोई त्रुटि दिखे तो vartalaapnews@gmail.com पर बताएँ।

निखिल कालिया

निखिल कालिया वार्तालाप के संपादक और प्रकाशक हैं। वे 2016 से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और जालंधर से पंजाब की स्थानीय खबरें कवर करते हैं — लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, चंडीगढ़ और पूरा राज्य। खबर, सुझाव या शिकायत के लिए संपर्क करें: vartalaapnews@gmail.com

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