पुलिस वेरिफिकेशन की स्थिति खुद देखी जा सकती है:
| कहाँ | passportindia.gov.in → Track Application Status |
|---|---|
| क्या चाहिए | फाइल नंबर (PSK की रसीद पर) और जन्मतिथि |
| ऐप | mPassport Seva (Android और iOS) |
| हेल्पलाइन | 1800-258-1800 |
| कितना समय | राष्ट्रीय औसत लगभग 14 दिन |
और यह नियम ज़रूर जान लीजिए: सामान्य आवेदन में अगर पुलिस वेरिफिकेशन तीन हफ्ते से ज़्यादा अटक जाए, तो पासपोर्ट कार्यालय पुलिस रिपोर्ट आए बिना भी पासपोर्ट जारी कर सकता है।
ज़्यादातर लोग यह नहीं जानते और चुपचाप महीनों इंतज़ार करते रहते हैं।
स्थिति का मतलब क्या है
| स्थिति | मतलब |
|---|---|
| Pending | थाने को भेज दिया गया, रिपोर्ट अभी नहीं आई |
| Clear | वेरिफिकेशन पूरा, कोई दिक्कत नहीं |
| Incomplete | पुलिस को और जानकारी चाहिए, या दोबारा आना है |
| Adverse | कोई आपत्ति दर्ज — मामला पुलिस मुख्यालय जाता है |
Adverse का मतलब सीधा रिजेक्शन नहीं होता। अकसर वजह पता, नाम की स्पेलिंग या किसी पुराने मामले का रिकॉर्ड होती है — और सफाई देने का मौका मिलता है।
अब काम तेज़ हो गया है
पहले पुलिस वेरिफिकेशन में हफ्तों, कभी-कभी महीनों लगते थे — क्योंकि कागज़ी फाइल एक दफ्तर से दूसरे तक चलती थी।
अब mPassport Police App आ चुका है। अधिकारी आपके घर आता है, वहीं मोबाइल से ब्योरा दर्ज करता है और रिपोर्ट उसी समय अपलोड कर देता है।
रिपोर्टों के अनुसार 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह ऐप चालू है, और वहाँ वेरिफिकेशन 5 से 7 दिन में पूरा हो जाता है।
अधिकारी आए तो क्या तैयार रखें
अधिकारी आपके घर आता है और वहीं पहचान तथा पते की पुष्टि करता है। साथ रखिए:
- आधार कार्ड — मूल
- बिजली या पानी का ताज़ा बिल
- किराए पर रहते हैं तो रजिस्टर्ड किराया अनुबंध
- अपना मकान है तो संपत्ति के कागज़
- PSK की रसीद
तीन बातें जो देरी करा देती हैं
1. आप घर पर नहीं मिलते। अधिकारी आता है, आप नहीं मिलते, और फाइल वापस चली जाती है। आवेदन के बाद के कुछ हफ्ते घर पर कोई ज़रूर रहे — या पड़ोसी को बताकर रखिए।
2. पड़ोसी पहचानते नहीं। अधिकारी अकसर पड़ोसियों से पुष्टि करता है। नए मोहल्ले में हैं तो यह अटक सकता है।
3. पते में फर्क। आवेदन में जो पता लिखा है, वह आधार और बिल से मेल खाना चाहिए। आधार में पता अलग हो तो पहले वह ठीक कराइए — आवेदन से पहले, बाद में नहीं।
पहले वेरिफिकेशन या पहले पासपोर्ट
दो तरह का होता है, और इससे तय होता है कि पासपोर्ट कब मिलेगा:
| Pre-PV | पहले वेरिफिकेशन, फिर पासपोर्ट छपता है — सामान्य नए आवेदन में |
|---|---|
| Post-PV | पहले पासपोर्ट, वेरिफिकेशन बाद में — तत्काल और कुछ श्रेणियों में |
आधार से जुड़ा आवेदन करने पर प्रक्रिया तेज़ मानी जाती है, और दस्तावेज़ भी कम लगते हैं।
नाबालिग के मामले में
बच्चों के पासपोर्ट में पुलिस वेरिफिकेशन आमतौर पर नहीं होता, इसलिए प्रक्रिया जल्दी निपटती है।
स्थिति देखते समय बच्चे का ही फाइल नंबर और जन्मतिथि डालिए — माता-पिता का नहीं। यह छोटी सी बात बहुत लोगों को अटकाती है।
अटक जाए तो — क्रम से
- पहले स्थिति देखिए — पता चलेगा कि फाइल पुलिस के पास है या पासपोर्ट कार्यालय के
- थाने में पता कीजिए — अगर “Pending” दिख रहा है। अकसर फाइल किसी अधिकारी के पास पड़ी होती है और एक बार जाने से काम हो जाता है
- पासपोर्ट कार्यालय में शिकायत — पोर्टल पर grievance का विकल्प है
- RTI दाखिल कीजिए — नीचे देखिए
RTI — यह रास्ता कम लोग इस्तेमाल करते हैं
अगर महीनों से फाइल अटकी है और कोई जवाब नहीं मिल रहा, तो सूचना का अधिकार के तहत पूछा जा सकता है:
- मेरी फाइल किस स्तर पर है?
- पुलिस रिपोर्ट कब भेजी गई या क्यों नहीं भेजी गई?
- अगर adverse है तो उसका आधार क्या है?
RTI की फीस ₹10 है और जवाब आमतौर पर 30 दिन में आता है। और अकसर RTI लगते ही फाइल अपने आप चल पड़ती है।
तत्काल या सामान्य
तत्काल में पासपोर्ट कुछ ही दिनों में मिल जाता है, सामान्य में तीन-चार हफ्ते लगते हैं। फीस भी तत्काल में कहीं ज़्यादा होती है।
पासपोर्ट की फीस समय-समय पर संशोधित होती रहती है। अपनी श्रेणी की मौजूदा फीस passportindia.gov.in पर देख लीजिए — आवेदन करते समय वहीं दिख जाती है।
अगर यात्रा एक महीने से ज़्यादा दूर है, तो सामान्य ही ठीक है — तत्काल का अतिरिक्त खर्च बेकार जाता है।
एक चेतावनी
- वेरिफिकेशन के लिए कोई पैसा नहीं देना होता। अगर कोई अधिकारी या बिचौलिया पैसे माँगे, तो वह रिश्वत है — और उसकी शिकायत की जा सकती है
- आवेदन सिर्फ
passportindia.gov.inसे कीजिए — मिलती-जुलती दिखने वाली बाकी साइटें निजी हैं और ज़्यादा फीस लेती हैं - किसी एजेंट को अपने मूल दस्तावेज़ या पोर्टल का पासवर्ड मत दीजिए
- ठगी हो जाए तो 1930 — पहला घंटा सबसे कीमती है
और आवेदन से पहले यह देख लीजिए कि आपके दस्तावेज़ DigiLocker में मौजूद हैं — वहाँ से निकाले गए दस्तावेज़ कानूनन मूल के बराबर हैं।
स्रोत: पासपोर्ट सेवा, विदेश मंत्रालय, भारत सरकार (passportindia.gov.in) — Track Application Status एवं mPassport Police App संबंधी जानकारी; पुलिस वेरिफिकेशन की समयसीमा एवं प्रक्रिया पर प्रकाशित मार्गदर्शन; सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। फीस, समयसीमा और प्रक्रिया बदलती रहती है और राज्य के हिसाब से अलग हो सकती है। आवेदन से पहले passportindia.gov.in पर मौजूदा जानकारी अवश्य देखें। कोई त्रुटि दिखे तो vartalaapnews@gmail.com पर बताएँ।


