DigiLocker से निकाला गया दस्तावेज़ कानूनन मूल दस्तावेज़ के बराबर है। यह किसी की राय नहीं — सरकारी नियम में लिखा है:
| नियम | IT (Digital Locker) Rules, 2016 का नियम 9A |
|---|---|
| अधिसूचना | G.S.R. 711(E), दिनांक 8 फरवरी 2017 |
| वेबसाइट | digilocker.gov.in — नि:शुल्क |
यह हवाला लिख लीजिए। अगर कोई दफ्तर DigiLocker का दस्तावेज़ लेने से मना करे, तो नियम का नाम और अधिसूचना संख्या बताना अकसर बात खत्म कर देता है।
पर एक शर्त है — यह सिर्फ “Issued” वाले दस्तावेज़ों पर लागू होता है, आपके खुद अपलोड किए हुए पर नहीं। यह फर्क नीचे समझाया है, और यहीं ज़्यादातर लोग गलती करते हैं।
नियम क्या कहता है
DigiLocker की आधिकारिक वेबसाइट पर स्पष्ट लिखा है कि इस प्रणाली से जारी किए गए दस्तावेज़ मूल भौतिक दस्तावेज़ों के समकक्ष माने जाते हैं।
इसका आधार है:
सूचना प्रौद्योगिकी (डिजिटल लॉकर सुविधा प्रदान करने वाले मध्यवर्ती संस्थानों द्वारा सूचना का संरक्षण एवं प्रतिधारण) नियम, 2016 का नियम 9A — जो 8 फरवरी 2017 को अधिसूचित हुआ, अधिसूचना संख्या G.S.R. 711(E)।
यह हवाला याद रखिए या लिख लीजिए। अगर कोई दफ्तर या संस्थान DigiLocker का दस्तावेज़ लेने से मना करे, तो नियम का नाम और अधिसूचना संख्या बताना अकसर बात खत्म कर देता है।
DigiLocker इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की डिजिटल इंडिया के तहत चलने वाली योजना है — यह कोई निजी ऐप नहीं है।
अब वह फर्क जो सबसे ज़्यादा लोग नहीं जानते
DigiLocker में दो अलग खाने होते हैं, और दोनों की कानूनी हैसियत अलग है:
| खाना | क्या है | मान्यता |
|---|---|---|
| Issued Documents | सीधे बोर्ड, विश्वविद्यालय या विभाग के रिकॉर्ड से खींचा गया | मूल के बराबर |
| Uploaded Documents | आपने खुद स्कैन करके डाला | सिर्फ आपकी निजी कॉपी |
यहीं सबसे बड़ी गलती होती है। लोग अपनी मार्कशीट स्कैन करके DigiLocker में डाल देते हैं और समझते हैं कि अब वह “डिजिटल और मान्य” हो गई। ऐसा नहीं है — वह सिर्फ एक PDF है, जैसे आपके फोन की गैलरी में पड़ी फोटो।
दाखिले, नौकरी या सरकारी काम के लिए हमेशा “Issued” वाला दस्तावेज़ ही इस्तेमाल कीजिए।
दस्तावेज़ कैसे मँगाएँ
digilocker.gov.inखोलिए या DigiLocker ऐप डाउनलोड कीजिए- आधार से जुड़े मोबाइल नंबर से साइन अप कीजिए, OTP से सत्यापन
- 6 अंकों का सिक्योरिटी PIN बनाइए
- Search Documents या Browse Documents में जाइए
- Education चुनकर अपना बोर्ड या विश्वविद्यालय ढूँढिए
- दस्तावेज़ का प्रकार चुनिए — मार्कशीट, पासिंग सर्टिफिकेट या माइग्रेशन सर्टिफिकेट
- रोल नंबर, साल और जन्मतिथि बिल्कुल वैसे भरिए जैसे बोर्ड के रिकॉर्ड में हैं
- सहमति देकर Get Document दबाइए
दस्तावेज़ आपके Issued खाने में आ जाएगा। यह सेवा नि:शुल्क है।
“No record found” आ जाए तो
यह सबसे आम शिकायत है, और इसकी वजहें सीमित हैं:
- पुराना साल — बोर्ड ने एक तय साल से पहले का रिकॉर्ड डिजिटल नहीं किया होता। बहुत पुरानी मार्कशीट DigiLocker पर नहीं मिलेगी।
- ब्योरे में फर्क — नाम, जन्मतिथि या रोल नंबर बोर्ड के रिकॉर्ड से ठीक वैसा मेल नहीं खा रहा। एक अक्षर का फर्क भी काफी है।
- संस्थान जुड़ा ही नहीं — हर विश्वविद्यालय DigiLocker से जुड़ा नहीं है।
ऐसे में क्या करें: पुराने रिकॉर्ड के लिए सीधे अपने बोर्ड से डुप्लीकेट मँगाना पड़ेगा — पंजाब बोर्ड के लिए पूरी प्रक्रिया यहाँ दी है। और अगर आपका विश्वविद्यालय जुड़ा ही नहीं है, तो उसे DigiLocker से जुड़ने के लिए लिखा जा सकता है।
सुधार DigiLocker से नहीं होता
यह साफ समझ लीजिए: नाम या जन्मतिथि में सुधार सिर्फ जारी करने वाली संस्था कर सकती है — बोर्ड या विश्वविद्यालय। DigiLocker तो बस रिकॉर्ड दिखाता है।
DigiLocker की सहायता सिर्फ लॉगिन या तकनीकी दिक्कत के लिए है। “सुधार करा देंगे” कहकर पैसे माँगने वाला कोई भी व्यक्ति ठग है।
APAAR और ABC ID — यह उलझन साफ कर लीजिए
कॉलेज के छात्रों को अकसर ये दो नाम सुनने को मिलते हैं और लगता है कि दो अलग काम करने हैं।
- APAAR ID — छात्र की स्थायी पहचान, जो स्कूल से कॉलेज तक साथ चलती है
- ABC (Academic Bank of Credits) — वह खाता जहाँ आपके कोर्स के क्रेडिट जमा होते हैं
राष्ट्रीय शैक्षणिक डिपॉजिटरी की जानकारी के अनुसार छात्र ABC पोर्टल (abc.gov.in) पर रजिस्टर करते हैं, और उसी पर APAAR ID बन जाती है। फिर वह ID अपने संस्थान को देनी होती है ताकि क्रेडिट आपके खाते में आते रहें।
यह पूरी व्यवस्था DigiLocker से ही जुड़ी है, इसलिए लॉगिन भी वही रहता है।
रजिस्ट्रेशन में सबसे आम गलती: रोल नंबर या रजिस्ट्रेशन नंबर गलत डालना। जो नंबर आपकी मार्कशीट पर है, वही डालिए। नए दाखिले वालों के पास अभी रोल नंबर न हो तो संस्थान से पूछिए।
दस्तावेज़ साझा कैसे करें
DigiLocker से दस्तावेज़ लिंक या QR कोड के रूप में साझा किया जा सकता है, जिससे सामने वाला उसे तुरंत सत्यापित कर लेता है।
यह फोटोकॉपी से बेहतर है — न कोई अटेस्टेशन चाहिए, न असली-नकली का सवाल। संस्थान से पहले पूछ लीजिए कि उन्हें PDF चाहिए, लिंक चाहिए या QR।
अभी करने लायक चार काम
- DigiLocker खाता बनाइए — आधार से जुड़े नंबर से
- 10वीं और 12वीं की मार्कशीट Issued में खींच लीजिए
- कॉलेज में हैं तो abc.gov.in पर APAAR/ABC ID बना लीजिए
- घर के बाकी लोगों के दस्तावेज़ भी जोड़ लीजिए — आधार, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन RC सब आ जाते हैं
यह काम एक बार का है और आधे घंटे का। जिस दिन दाखिले या नौकरी का फॉर्म भरना होगा, उस दिन कागज़ ढूँढने का समय नहीं होगा।
एक चेतावनी
DigiLocker पूरी तरह नि:शुल्क है और सरकारी है। एकमात्र आधिकारिक पता digilocker.gov.in और आधिकारिक ऐप है।
- मिलती-जुलती दिखने वाली बाकी सब वेबसाइटें और ऐप निजी हैं
- अपना सिक्योरिटी PIN और OTP किसी को न दें — DigiLocker में आपके सारे पहचान दस्तावेज़ रहते हैं
- किसी साइबर कैफे के फोन नंबर से खाता कभी न बनवाएँ
स्रोत: DigiLocker (digilocker.gov.in), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार — नियम 9A, सूचना प्रौद्योगिकी (डिजिटल लॉकर) नियम 2016, अधिसूचना G.S.R. 711(E) दिनांक 8 फरवरी 2017; राष्ट्रीय शैक्षणिक डिपॉजिटरी (nad.digilocker.gov.in); CBSE शैक्षणिक रिपॉजिटरी (cbse.digitallocker.gov.in); Academic Bank of Credits (abc.gov.in)।
बोर्ड और विश्वविद्यालयों की उपलब्धता तथा किस वर्ष से रिकॉर्ड डिजिटल है, यह अलग-अलग है। अपने मामले के लिए digilocker.gov.in पर देखें। कोई त्रुटि दिखे तो vartalaapnews@gmail.com पर बताएँ।
