ये वे सीमाएँ हैं जिनके पार जाते ही बैंक या संस्था आपके PAN के साथ सूचना आयकर विभाग को भेज देती है:
| क्या | सीमा (एक वित्त वर्ष में) |
|---|---|
| बचत खाते में नकद जमा | ₹10 लाख |
| चालू खाते में नकद जमा | ₹50 लाख |
| फिक्स्ड डिपॉज़िट | ₹10 लाख |
| संपत्ति की खरीद-बिक्री | ₹30 लाख |
| म्यूचुअल फंड या शेयर | ₹10 लाख |
| क्रेडिट कार्ड का बिल | ₹10 लाख (नकद भरा तो ₹1 लाख) |
| विदेशी मुद्रा | ₹10 लाख |
इसे SFT (Statement of Financial Transactions) कहते हैं, और यह सब आपके AIS में दिखता है।
और सबसे ज़रूरी बात पहले ही जान लीजिए: ₹10 लाख जमा करना गैर-कानूनी नहीं है। यह बैंक पर सूचना देने की ज़िम्मेदारी है, आप पर टैक्स नहीं। दिक्कत तभी आती है जब आप स्रोत न बता पाएँ।
तीन गलतफहमियाँ
1. “हर बैंक की अलग सीमा होती है”
नहीं। सीमा आपके PAN पर है, खाते पर नहीं।
SBI में ₹4 लाख, HDFC में ₹3 लाख, ICICI में ₹3 लाख — तीनों जुड़कर ₹10 लाख हो जाते हैं, और रिपोर्टिंग हो जाती है।
विभाग सब कुछ PAN के हिसाब से जोड़ता है, बैंक के हिसाब से नहीं।
2. “छोटे-छोटे हिस्सों में जमा कर दूँ तो बच जाऊँगा”
यह सबसे खतरनाक सोच है।
जानबूझकर रकम को टुकड़ों में बाँटकर सीमा से नीचे रखना structuring कहलाता है, और यह अपने आप में एक लाल झंडा है।
अगर आपकी रकम जायज़ है, तो एक साथ जमा कीजिए और स्रोत का कागज़ रखिए। बाँटने से शक बढ़ता है, घटता नहीं।
3. “नोटिस का मतलब जुर्माना”
नहीं। नोटिस का मतलब है कि विभाग स्रोत पूछ रहा है।
अगर पैसा वेतन, संपत्ति की बिक्री, विरासत, उपहार या पहले से टैक्स चुकाई गई आमदनी से आया है — और आप कागज़ दिखा सकते हैं — तो आमतौर पर कोई जुर्माना नहीं लगता।
₹50,000 वाला नियम
यह अलग नियम है और रोज़ काम आता है।
एक ही दिन में ₹50,000 या उससे ज़्यादा नकद जमा करने पर PAN देना ज़रूरी है — यह आयकर नियमों की शर्त है।
PAN न हो तो फॉर्म 60 भरना पड़ता है।
अब वह नियम जो सबसे कम जाना जाता है — और सबसे भारी है
आयकर अधिनियम की धारा 269ST।
इसके अनुसार आप किसी एक व्यक्ति से, एक दिन में, या एक ही लेन-देन में, या एक ही अवसर से जुड़े लेन-देन में ₹2 लाख या उससे ज़्यादा नकद नहीं ले सकते।
और जुर्माना? धारा 271DA के तहत उतना ही जितनी रकम ली गई।
यानी ₹2.5 लाख नकद लिए — तो ₹2.5 लाख का जुर्माना।
यह किन-किन जगह लागू होता है
ध्यान दीजिए — यह लेने वाले पर लगता है, देने वाले पर नहीं। और रोज़मर्रा की इन जगहों पर लागू हो जाता है:
- गाड़ी या ज़मीन बेचकर नकद लेना
- शादी में नकद लेन-देन — “एक ही अवसर” वाली शर्त यहीं लगती है
- दुकानदार का एक ग्राहक से बड़ी नकद रकम लेना
- किसी से नकद कर्ज़ लेना या चुकाना
₹2 लाख से ऊपर का कोई भी लेन-देन बैंक के रास्ते कीजिए — UPI, चेक, NEFT या RTGS से। इसमें कुछ खर्च नहीं होता, और पूरा जोखिम खत्म हो जाता है।
नोटिस आ जाए तो क्या करें
घबराइए मत। क्रम से कीजिए:
- पहले AIS देखिए —
incometax.gov.inपर। पता चलेगा कि विभाग के पास कौन सा आँकड़ा है - स्रोत के कागज़ जुटाइए — नीचे सूची है
- समय पर जवाब दीजिए — नोटिस में तारीख लिखी होती है, और चूकने पर मामला बढ़ जाता है
- रकम बड़ी हो तो CA से बात कीजिए
स्रोत के कागज़ — कौन से
- वेतन — सैलरी स्लिप, Form 16
- संपत्ति की बिक्री — रजिस्ट्री और बैंक स्टेटमेंट
- विरासत — वसीयत या उत्तराधिकार प्रमाण पत्र
- उपहार — गिफ्ट डीड, और देने वाले का ब्योरा
- कारोबार — बही-खाते और ITR
- कर्ज़ — लोन एग्रीमेंट और बैंक रिकॉर्ड
ये कागज़ लेन-देन के समय ही संभाल लीजिए, सालों बाद नोटिस आने पर नहीं ढूँढने पड़ेंगे।
एक बड़ा बदलाव
1 अप्रैल 2026 से नया आयकर कानून लागू हुआ है, और इसके साथ धाराओं तथा नियमों के नंबर बदल गए हैं।
सीमाएँ वही हैं, पर अगर आप कहीं पुराने नंबर पढ़ें और कहीं नए — तो घबराइए मत, बात एक ही है। अपने मामले की मौजूदा स्थिति incometax.gov.in से या CA से पुष्टि कर लीजिए।
सुरक्षित रहने के चार तरीके
- ₹2 लाख से ऊपर नकद मत लीजिए — बैंक के रास्ते लीजिए
- PAN हर खाते में अपडेट रखिए
- बड़ी रकम का स्रोत लिखित में रखिए — उसी समय
- साल में एक बार AIS देखिए — ITR भरने से पहले, नोटिस आने से पहले
चौथा सबसे आसान और सबसे कम किया जाने वाला काम है। AIS और Form 26AS देखने का पूरा तरीका यहाँ दिया है — और अगर उसमें कोई ऐसा लेन-देन दिखे जो आपका है ही नहीं, तो वह PAN के दुरुपयोग का संकेत हो सकता है।
एक चेतावनी
- आयकर विभाग नोटिस आधिकारिक पोर्टल और रजिस्टर्ड ईमेल से भेजता है — व्हाट्सएप पर नहीं
- “नोटिस रद्द करा देंगे” या “सेटिंग करा देंगे” कहने वाला हर व्यक्ति ठग है
- किसी को अपना PAN पासवर्ड या OTP मत दीजिए
- ठगी हो जाए तो 1930 — पहला घंटा सबसे कीमती है
स्रोत: आयकर विभाग की SFT (Statement of Financial Transactions) व्यवस्था एवं संबंधित नियम; PAN संबंधी नियम; धारा 269ST एवं 271DA; आयकर अधिनियम 2025 के 1 अप्रैल 2026 से लागू होने संबंधी रिपोर्टिंग; आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल (incometax.gov.in)।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, कर सलाह नहीं। सीमाएँ, धाराओं के नंबर और प्रक्रिया बदलती रहती हैं, और हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है। अपने मामले के लिए किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट से परामर्श करें और incometax.gov.in से मौजूदा नियम देखें। कोई त्रुटि दिखे तो vartalaapnews@gmail.com पर बताएँ।
