बरसात के बाद के हफ्ते डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के लिए सबसे भारी होते हैं। बुखार आते ही ज़्यादातर लोग सीधे निजी लैब जाते हैं और टेस्ट के पैसे देते हैं।
जबकि पंजाब में यह टेस्ट सरकारी सुविधाओं पर नि:शुल्क है।
कहाँ मुफ्त टेस्ट होता है
स्वास्थ्य विभाग की जानकारी के अनुसार:
| सुविधा | क्या मिलता है |
|---|---|
| 47 सेंटिनल सर्विलांस अस्पताल | डेंगू और चिकनगुनिया की नि:शुल्क ELISA जाँच |
| सभी आम आदमी क्लीनिक | मलेरिया RDT और डेंगू टेस्ट |
ये सेंटिनल अस्पताल राज्य के सभी ज़िलों में चिन्हित किए गए हैं, और वहाँ जाँच के लिए ज़रूरी किट उपलब्ध रहती हैं।
अपने ज़िले का सेंटिनल अस्पताल कैसे पता करें: अपने नज़दीकी सरकारी अस्पताल या आम आदमी क्लीनिक पर पूछिए, या सिविल सर्जन कार्यालय से। हर ज़िले के सिविल सर्जन का नंबर ज़िले की सरकारी वेबसाइट पर है — लुधियाना, जालंधर, बठिंडा के नंबर हमारे लेखों में दिए हैं।
पहले आम आदमी क्लीनिक जाइए
बुखार होने पर सबसे पहला ठिकाना नज़दीकी आम आदमी क्लीनिक हो सकता है — वहाँ डेंगू और मलेरिया दोनों की जाँच की सुविधा है, और वे मोहल्ले के पास होते हैं।
ज़रूरत पड़ने पर वहीं से बड़े अस्पताल में भेजा जाता है।
डॉक्टर के पास तुरंत कब जाएँ
यह हिस्सा ध्यान से पढ़िए। बुखार में इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो इंतज़ार मत कीजिए — तुरंत अस्पताल जाइए:
- पेट में तेज़ दर्द या लगातार उल्टी
- कहीं से भी खून आना — नाक, मसूड़े, उल्टी या मल में
- त्वचा पर लाल चकत्ते या धब्बे
- साँस लेने में तकलीफ
- बहुत ज़्यादा कमज़ोरी, बेचैनी या सुस्ती
- पेशाब कम आना
- बुखार उतरने के बाद हालत और बिगड़ना
आखिरी वाला बिंदु सबसे खतरनाक है और सबसे कम जाना जाता है। डेंगू में बुखार उतरने के बाद के दिन कई बार सबसे नाज़ुक होते हैं। बुखार गया, इसका मतलब यह नहीं कि खतरा टल गया।
बच्चों और बुज़ुर्गों में स्थिति तेज़ी से बिगड़ सकती है — उनके मामले में और भी जल्दी दिखाइए।
खुद दवा मत लीजिए
यह सबसे ज़रूरी चेतावनी है।
बुखार में मेडिकल स्टोर से खुद दर्द या बुखार की दवा ले लेना आम बात है। लेकिन डेंगू के संदेह में कुछ आम दर्द निवारक दवाएँ खतरनाक हो सकती हैं, क्योंकि वे खून बहने का खतरा बढ़ा सकती हैं।
इसलिए बुखार में कोई भी दवा डॉक्टर से पूछे बिना मत लीजिए — खासकर तब जब डेंगू का मौसम चल रहा हो। कौन सी दवा लेनी है और कौन सी नहीं, यह डॉक्टर ही बताएगा।
यह लेख किसी भी तरह चिकित्सीय सलाह नहीं है। बुखार होने पर डॉक्टर को दिखाइए।
इलाज का खर्च — सेहत बीमा देखिए
भर्ती होने की नौबत आए तो मुख्य मंत्री सेहत बीमा योजना के तहत कैशलेस इलाज मिल सकता है। ख़बरों के अनुसार मच्छर जनित बीमारियों के इलाज के लिए भी इसका इस्तेमाल हुआ है।
पर इसके लिए ई-कार्ड बना होना चाहिए। पंजाब में 1.68 करोड़ लोग पात्र हैं पर कार्ड सिर्फ करीब 88 लाख के पास है।
अभी जाँच लीजिए कि आप पात्र हैं या नहीं — बीमारी के वक्त यह काम नहीं हो पाता। पात्रता जाँचने और ई-कार्ड बनवाने की पूरी प्रक्रिया यहाँ है।
हर शुक्रवार डेंगू ते वार
राज्य सरकार का अभियान “हर शुक्रवार डेंगू ते वार” हर शुक्रवार सुबह 8 से 9 बजे चलता है।
इसमें करना बस इतना है — उस एक घंटे में अपने घर और आसपास जमा पानी हटा दीजिए:
- कूलर — पानी निकालकर सुखाइए
- गमले और उनकी तश्तरियाँ
- छत की टंकी और उसका ढक्कन
- पुराने टायर, टूटे बर्तन, डिब्बे
- छत या आँगन में पड़ा कोई भी बर्तन
- फ्रिज के पीछे की ट्रे
डेंगू का मच्छर साफ जमा पानी में पनपता है, गंदे नाले में नहीं। इसीलिए साफ-सुथरे घरों में भी डेंगू होता है — लोग सोचते हैं “हमारे यहाँ तो गंदगी नहीं है”, और कूलर की तरफ ध्यान ही नहीं जाता।
आँकड़े क्या कहते हैं
सरकारी जानकारी के अनुसार पंजाब में डेंगू के पुष्ट मामले 2021 में 23,389 थे, जो 2025 में घटकर 4,981 रह गए। इसी अवधि में मौतें 55 से घटकर 8 हुईं।
यानी हालात सुधरे हैं — लेकिन खतरा खत्म नहीं हुआ। और सुधार की बड़ी वजह घर-घर सर्विलांस और लोगों की भागीदारी बताई गई है।
एक चेतावनी
बुखार के मौसम में ठगी भी बढ़ती है।
- व्हाट्सएप पर घूमने वाले “डेंगू का घरेलू इलाज” वाले नुस्खों के भरोसे मत रहिए — जाँच करवाइए
- प्लेटलेट्स के नाम पर मोटी रकम माँगने वाले बिचौलियों से सावधान रहिए
- सरकारी अस्पताल में जाँच मुफ्त है — कोई पैसे माँगे तो सिविल सर्जन कार्यालय में शिकायत कीजिए
स्रोत: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, पंजाब सरकार — राज्य टास्क फोर्स बैठक एवं “हर शुक्रवार डेंगू ते वार” अभियान संबंधी सरकारी विज्ञप्तियाँ, जैसा विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रकाशित हुआ; मुख्य मंत्री सेहत बीमा योजना संबंधी रिपोर्टिंग।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, चिकित्सीय सलाह नहीं। बुखार या किसी भी लक्षण की स्थिति में योग्य डॉक्टर से ही परामर्श करें और अपनी मर्ज़ी से कोई दवा न लें। सरकारी सुविधाओं की उपलब्धता ज़िले के हिसाब से अलग हो सकती है — अपने नज़दीकी सरकारी अस्पताल या सिविल सर्जन कार्यालय से पुष्टि करें। कोई त्रुटि दिखे तो vartalaapnews@gmail.com पर बताएँ।


