शुक्रवार, 18 सितम्बर 2026
बैंक

मिनिमम ड्यू भरने से ब्याज नहीं रुकता — और नए खर्च पर भी पहले दिन से लगने लगता है

क्रेडिट कार्ड का ब्याज बिल की तारीख से नहीं, खरीदारी की तारीख से लगता है। और मिनिमम ड्यू भरने पर सिर्फ पुराने बकाया पर नहीं — नए खर्चों पर भी पहले दिन से ब्याज चलने लगता है। RBI के वे नियम जो आपके हक में हैं।

क्रेडिट कार्ड मिनिमम ड्यू का जाल — ब्याज खरीदारी के दिन से लगता है — वार्तालाप

क्रेडिट कार्ड का बिल आता है और उस पर दो रकम लिखी होती है — Total Amount Due और Minimum Amount Due

तंगी में लोग मिनिमम भर देते हैं, यह सोचकर कि “बैंक को भुगतान तो हो गया, बाकी अगले महीने”।

यहीं सबसे महँगी गलती होती है।

मिनिमम ड्यू क्या करता है और क्या नहीं

करता है नहीं करता
देर से भुगतान का ठप्पा बचाता है ब्याज नहीं रोकता
लेट फीस बचाता है ब्याज-मुक्त अवधि नहीं बचाता

मिनिमम ड्यू आमतौर पर कुल बकाया का लगभग 5% होता है। वह भर देने से आप “डिफॉल्टर” नहीं बनते — पर ब्याज पूरे बकाया पर चलता रहता है

अब दो बातें जो ज़्यादातर लोग नहीं जानते

1. ब्याज बिल की तारीख से नहीं, खरीदारी की तारीख से लगता है

बैंक Average Daily Balance तरीके से गणना करते हैं। यानी ब्याज उस दिन से चलता है जिस दिन आपने कार्ड स्वाइप किया था — बिल बनने या due date से नहीं।

इसीलिए बिल में ब्याज उम्मीद से ज़्यादा दिखता है।

2. ब्याज-मुक्त अवधि खत्म हो जाती है — नए खर्चों पर भी

यह सबसे भारी बात है।

जब तक आप पूरा बिल भरते रहते हैं, आपको 20 से 50 दिन की ब्याज-मुक्त अवधि मिलती है — यही कार्ड का असली फायदा है।

पर जिस महीने आप मिनिमम भरते हैं, वह सुविधा बंद हो जाती है। और फिर:

  • पुराने बकाया पर ब्याज चलता है
  • और अगले महीने के हर नए खर्च पर भी, पहले दिन से

यानी अगले महीने आपने ₹500 की सब्ज़ी कार्ड से ली — उस पर भी उसी दिन से ब्याज लगना शुरू।

ब्याज-मुक्त अवधि वापस कब मिलती है? सिर्फ तब, जब आप पूरा बकाया 100% चुका दें। उसके बाद अगले चक्र से दोबारा शुरू होती है।

दर कितनी है

भारत में ज़्यादातर कार्ड पर ब्याज 3% से 3.75% प्रति माह होता है।

सालाना निकालिए तो यह 36% से 45% बैठता है।

बैंक बिल में मासिक दर बड़ी लिखते हैं और सालाना छोटी। पर गिनती सालाना वाली ही होती है।

यह जोड़ देखिए

अगर ₹1 लाख का बकाया हो और आप हर महीने सिर्फ मिनिमम भरते रहें, बिना कोई नया खर्च किए — तो उपलब्ध गणनाओं के अनुसार उसे चुकाने में आठ साल से ज़्यादा लग सकते हैं, और ब्याज ही ₹1.5 लाख से ऊपर चला जाता है।

यानी मूल रकम से ज़्यादा ब्याज।

RBI के आँकड़ों के हवाले से बताया जाता है कि भारत में लगभग 13% कार्डधारक हर महीने सिर्फ मिनिमम भरते हैं।

एक और नुकसान जो छिपा रहता है

मिनिमम भरते रहने से आपका क्रेडिट यूटिलाइजेशन — यानी लिमिट का कितना हिस्सा इस्तेमाल में है — ऊँचा बना रहता है।

और ऊँचा यूटिलाइजेशन CIBIL स्कोर गिराता है, भले ही आप हर महीने समय पर भुगतान कर रहे हों।

यानी आप “डिफॉल्टर” नहीं हैं, फिर भी स्कोर गिर रहा है — और वजह समझ नहीं आती। अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चारों ब्यूरो से मुफ्त निकालकर यह खुद देखा जा सकता है।

RBI के वे नियम जो आपके हक में हैं

ये जान लीजिए, क्योंकि इनसे आप जाँच सकते हैं कि बैंक सही चार्ज कर रहा है या नहीं।

1. जुर्माना सिर्फ बकाया हिस्से पर

पहले कई बैंक पूरे बिल पर जुर्माना लगा देते थे, चाहे आपने कितना भी भर दिया हो।

अब जुर्माना सिर्फ न चुकाए गए हिस्से पर लगता है।

यानी बिल ₹50,000 था और आपने ₹45,000 भर दिए — तो लेट फीस ₹5,000 पर लगेगी, पूरे ₹50,000 पर नहीं।

2. तीन दिन की छूट

due date के बाद तीन दिन के भीतर भुगतान कर देने पर आमतौर पर न लेट फीस लगती है, न क्रेडिट ब्यूरो में “past due” दर्ज होता है।

यह जान लेना कीमती है। तारीख एक-दो दिन आगे निकल जाए तो घबराने की ज़रूरत नहीं — पर तीसरे दिन तक भर दीजिए।

3. बिल में सालाना दर लिखी होनी चाहिए

नियमों के अनुसार स्टेटमेंट में वार्षिक दर साफ दिखनी चाहिए — सिर्फ मासिक प्रतिशत नहीं। साथ ही यह भी बताया जाना चाहिए कि सिर्फ मिनिमम भरते रहने पर कुल कितना पड़ेगा।

अपना अगला स्टेटमेंट खोलकर देखिए। अगर ये जानकारी नहीं है, तो बैंक नियमों का पालन नहीं कर रहा — और यह शिकायत का आधार है।

4. लिमिट बढ़ाने के लिए आपकी सहमति ज़रूरी

बैंक आपकी सहमति के बिना क्रेडिट लिमिट नहीं बढ़ा सकता। बिना पूछे बढ़ा दी गई हो तो शिकायत कीजिए।

2027 से एक बड़ा बदलाव आ रहा है

RBI की Responsible Business Conduct (Second Amendment) Directions, 2026 — जो 15 जून 2026 को जारी हुईं और 1 जनवरी 2027 से लागू होंगी — इसी समस्या को छूती हैं।

इनके अनुसार मिनिमम ड्यू ऐसा होना चाहिए कि उसमें पूरा ब्याज और मूल रकम का कुछ हिस्सा शामिल हो

अभी होता यह है कि मिनिमम भरने पर भी बकाया बढ़ता रह सकता है, क्योंकि भुगतान ब्याज से भी कम पड़ जाता है। नया नियम यही बंद करता है।

अपनी स्थिति के लिए RBI की वेबसाइट पर मौजूदा निर्देश देख लीजिए।

अगर बकाया पहले से चढ़ चुका है

घबराइए मत, पर जल्दी कीजिए। रास्ते हैं:

  1. EMI में बदलवाइए — बैंक से बात कीजिए। EMI पर ब्याज आमतौर पर 12-18% पड़ता है, जबकि रिवॉल्विंग पर 36-45%। यह सबसे बड़ी बचत है और बस एक फोन कॉल की दूरी पर है।
  2. कार्ड इस्तेमाल करना रोक दीजिए — जब तक बकाया साफ न हो। नए खर्च पर भी पहले दिन से ब्याज लग रहा है।
  3. मिनिमम से ज़्यादा भरिए — जितना भी ज़्यादा हो सके
  4. कई कार्ड हों तो सबसे ऊँची दर वाला पहले चुकाइए

बैंक से बात करने में झिझकिए मत। बैंक के लिए भी बेहतर है कि पैसा आता रहे, बजाय इसके कि खाता खराब हो जाए।

तीन आदतें जो सब बदल देती हैं

  1. हमेशा Total Amount Due भरिए — मिनिमम नहीं। ब्याज शून्य रहेगा।
  2. ऑटो-डेबिट “पूरा बिल” पर लगाइए, “मिनिमम” पर नहीं। बहुत से लोग गलती से मिनिमम चुन लेते हैं और सालों बाद पता चलता है।
  3. लिमिट का 30% से कम इस्तेमाल कीजिए — स्कोर के लिए अच्छा रहता है

एक चेतावनी

  • “क्रेडिट कार्ड का बकाया सेटल करा देंगे” — सेटलमेंट आपकी रिपोर्ट में “settled” दर्ज करा देता है, जो “closed” से बहुत खराब है और सालों तक नुकसान करता है
  • किसी को अपना कार्ड नंबर, CVV या OTP मत दीजिए — बैंक कभी नहीं माँगता
  • “लिमिट बढ़वा देंगे” या “कैश निकलवा देंगे” कहने वाला हर फोन ठगी है
  • ठगी हो जाए तो 1930पहला घंटा सबसे कीमती है

और EMI या भुगतान चूक जाए तो 30 दिन वाली खिड़की याद रखिए — उसमें भर देने पर स्कोर बच जाता है।


स्रोत: भारतीय रिज़र्व बैंक की Master Direction — Credit Card and Debit Card (Issuance and Conduct) Directions, 2022; RBI की Responsible Business Conduct (Second Amendment) Directions, 2026 संबंधी रिपोर्टिंग; ब्याज गणना, ब्याज-मुक्त अवधि एवं मिनिमम ड्यू पर प्रकाशित मार्गदर्शन।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, वित्तीय सलाह नहीं। ब्याज दर, मिनिमम ड्यू की गणना और शर्तें हर कार्ड और बैंक में अलग होती हैं। अपने कार्ड की MITC (Most Important Terms and Conditions) और मासिक स्टेटमेंट अवश्य पढ़ें। कोई त्रुटि दिखे तो vartalaapnews@gmail.com पर बताएँ।

निखिल कालिया

निखिल कालिया वार्तालाप के संपादक और प्रकाशक हैं। वे 2016 से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और जालंधर से पंजाब की स्थानीय खबरें कवर करते हैं — लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, चंडीगढ़ और पूरा राज्य। खबर, सुझाव या शिकायत के लिए संपर्क करें: vartalaapnews@gmail.com

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