लॉकर में सोना रखकर लोग निश्चिंत हो जाते हैं — यह मानकर कि अब वह पूरी तरह सुरक्षित है और कुछ हुआ तो बैंक भरपाई करेगा।
यह गलतफहमी महँगी पड़ सकती है।
पहले सबसे ज़रूरी बात
RBI ने 18 अगस्त 2021 को संशोधित दिशानिर्देश जारी किए (परिपत्र RBI/2021-22/125), जो 1 जनवरी 2022 से लागू हुए।
इनके अनुसार बैंक की लापरवाही से नुकसान होने पर मुआवज़ा सालाना लॉकर किराए के 100 गुना तक सीमित है।
| सालाना किराया | अधिकतम मुआवज़ा |
|---|---|
| ₹1,000 | ₹1,00,000 |
| ₹3,000 | ₹3,00,000 |
| ₹5,000 | ₹5,00,000 |
लॉकर में 20 लाख का सोना हो और किराया ₹3,000 हो — तो भी ज़्यादा से ज़्यादा ₹3 लाख मिलेंगे।
इसीलिए यह समझ लेना ज़रूरी है: लॉकर एक सुरक्षित जगह है, बीमा नहीं।
बैंक कब ज़िम्मेदार है, कब नहीं
| बैंक ज़िम्मेदार | बैंक ज़िम्मेदार नहीं |
|---|---|
| आग | भूकंप |
| चोरी, सेंधमारी, डकैती | बाढ़ |
| इमारत गिरना | बिजली गिरना, तूफान |
| बैंक कर्मचारी की धोखाधड़ी | ग्राहक की अपनी लापरवाही |
प्राकृतिक आपदा में बैंक की कोई ज़िम्मेदारी नहीं है — बिल्कुल भी नहीं।
पंजाब में बाढ़ आना कोई अनहोनी बात नहीं है। यह जान लेना ज़रूरी है।
बीमा अलग से लीजिए — पर बैंक ज़बरदस्ती नहीं कर सकता
ज़्यादा कीमत का सामान रखते हैं तो अलग से बीमा लेना समझदारी है।
पर एक बात साफ है: बैंक लॉकर देने की शर्त के तौर पर बीमा खरीदने को मजबूर नहीं कर सकता। अगर कोई ऐसा कहे तो वह नियमों के खिलाफ है।
वह नियम जो सबसे ज़्यादा चौंकाता है
अगर लॉकर सात साल तक नहीं खोला गया और लॉकर धारक का पता नहीं चल रहा — तो बैंक सामान निकाल सकता है।
और यह तब भी लागू है जब किराया नियमित रूप से भरा जा रहा हो।
ऐसी स्थिति में बैंक सामान नामांकित व्यक्ति या कानूनी वारिस को दे सकता है, या पारदर्शी तरीके से उसका निपटान कर सकता है।
इसका मतलब: किराया भरते रहना काफी नहीं है। साल में कम से कम एक बार लॉकर खोलिए, और बैंक में अपना पता तथा मोबाइल नंबर अपडेट रखिए।
एक हक जो लगभग कोई नहीं जानता
अगर बैंक की अपनी वजह से — सिस्टम खराब होना या स्टाफ न होना — आपको लगातार सात कार्य दिवस से ज़्यादा लॉकर तक पहुँचने नहीं दिया गया, तो भी मुआवज़े का प्रावधान बताया गया है।
यानी “आज नहीं खुलेगा, कल आइए” बार-बार सुनना आपकी मजबूरी नहीं है।
ऐसी स्थिति में हर बार तारीख नोट कीजिए और लिखित शिकायत दीजिए। बिना रिकॉर्ड के दावा नहीं बनता।
क्या रख सकते हैं, क्या नहीं
लॉकर समझौते में यह शर्त होती है कि उसमें कुछ भी गैर-कानूनी या खतरनाक नहीं रखा जाएगा।
और एक बात जो बहुत से लोग नहीं जानते — लॉकर में नकद नहीं रखा जा सकता।
आमतौर पर रखा जाता है: गहने, ज़मीन के कागज़, बीमा पॉलिसी, वसीयत और ज़रूरी दस्तावेज़।
नया समझौता — यह ज़रूर जाँच लीजिए
RBI के नए नियमों के तहत हर लॉकर धारक को संशोधित समझौते पर हस्ताक्षर करना ज़रूरी है।
अगर आपका लॉकर 2022 से पहले का है और आपने नया समझौता कभी साइन नहीं किया — तो अभी बैंक जाकर कीजिए।
इसके बिना दो दिक्कतें हैं:
- बैंक लॉकर तक पहुँच रोक सकता है या सुविधा बंद कर सकता है
- कुछ हो जाने पर आपकी कानूनी स्थिति कमज़ोर रहती है
समझौते की एक प्रति अपने पास ज़रूर रखिए — बैंक उसे देने के लिए बाध्य है।
नॉमिनी ज़रूर भरिए
यह पाँच मिनट का काम है और लोग सालों टालते हैं।
नॉमिनी न हो तो लॉकर धारक की मृत्यु के बाद परिवार को उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए अदालत जाना पड़ सकता है — महीनों, कभी-कभी सालों का काम।
नॉमिनी दर्ज हो तो प्रक्रिया कहीं आसान होती है।
लॉकर बंद कराना हो तो
- बंद कराने का कोई शुल्क नहीं लिया जाता
- अगर किराया अग्रिम भरा है, तो बची हुई अवधि का पैसा वापस मिलना चाहिए
शाखा बदल रही हो तो
बैंक का विलय हो, शाखा बंद हो या कहीं और शिफ्ट हो रही हो — तो नियम के अनुसार बैंक को दो अखबारों में सार्वजनिक सूचना (जिनमें एक स्थानीय भाषा का हो) देनी होती है, और ग्राहकों को कम से कम दो महीने पहले सूचित करना होता है।
अभी करने लायक चार काम
- नया समझौता साइन किया या नहीं — जाँच लीजिए
- नॉमिनी दर्ज है या नहीं — देख लीजिए
- पता और मोबाइल नंबर बैंक में अपडेट कीजिए
- साल में एक बार लॉकर खोलिए — भले काम न हो
और घर में लॉकर की चाबी कहाँ है, यह परिवार में किसी एक को पता होना चाहिए। चाबी खो जाने पर लॉकर तुड़वाना पड़ता है और उसका खर्च ग्राहक से लिया जाता है।
एक चेतावनी
- लॉकर के लिए किसी बिचौलिए की ज़रूरत नहीं — प्रतीक्षा सूची पारदर्शी होनी चाहिए और शाखा में दर्ज
- बैंक की किसी सेवा को ज़बरदस्ती जोड़ने पर शिकायत कीजिए
- शाखा में बात न बने तो बैंकिंग लोकपाल का रास्ता है
और अगर आपका बैंक खाता लंबे समय से नहीं चला, तो वह भी जाँच लीजिए — निष्क्रिय खाते के साथ लॉकर का किराया कटना भी रुक सकता है।
स्रोत: भारतीय रिज़र्व बैंक का परिपत्र RBI/2021-22/125, दिनांक 18 अगस्त 2021 — सुरक्षित जमा लॉकर संबंधी संशोधित निर्देश, प्रभावी 1 जनवरी 2022; सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद जारी दिशानिर्देशों संबंधी रिपोर्टिंग।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं। बैंकों की शर्तें, किराया और प्रक्रिया अलग-अलग होती है और नियम समय-समय पर बदलते हैं। अपने लॉकर समझौते की शर्तें और मौजूदा नियम अपने बैंक या rbi.org.in से देखें। कोई त्रुटि दिखे तो vartalaapnews@gmail.com पर बताएँ।


