गुरूवार, 5 नवम्बर 2026
पंजाब

फसल का नुकसान हुआ है? — गिरदावरी में आपकी entry सही है या नहीं, अभी जाँच लीजिए

बाढ़ और बारिश से हुए नुकसान के लिए पंजाब में विशेष गिरदावरी हुई है, और मुआवज़ा उसी रिपोर्ट से तय होता है। रिपोर्ट सरपंच और लंबरदार तक पहुँचती है — वहीं जाकर अपनी entry देखिए। गलत हो तो अपील का हक है।

गिरदावरी में entry सही है या नहीं — फसल नुकसान का मुआवज़ा — वार्तालाप

बाढ़, बारिश या ओलों से फसल का नुकसान हुआ हो तो मुआवज़ा एक ही चीज़ से तय होता है — गिरदावरी की entry।

अगर उसमें आपका नुकसान दर्ज नहीं हुआ, तो मुआवज़ा नहीं मिलेगा — चाहे नुकसान कितना भी हुआ हो।

गिरदावरी क्या है पटवारी का रिकॉर्ड — किसकी ज़मीन, कौन जोत रहा है, खसरा नंबर, रकबा, कौन सी फसल और उसकी हालत
कब होती है साल में कम से कम दो बार
विशेष गिरदावरी बाढ़, ओले या सूखे जैसी आपदा के बाद, अलग से
रिपोर्ट कहाँ जाती है सरपंच, पंच और लंबरदार तक
गलत हो तो राजस्व अधिकारी की अदालत में अपील

सबसे ज़रूरी काम यही है — अपने गाँव के सरपंच या लंबरदार के पास जाकर रिपोर्ट देखिए कि आपकी ज़मीन उसमें है या नहीं।

अभी की स्थिति

अगस्त-सितंबर की बाढ़ के बाद पंजाब सरकार ने विशेष गिरदावरी के आदेश दिए। राजस्व मंत्री के बयान के अनुसार उपायुक्तों को कहा गया कि पानी उतरते ही यह काम पूरा करके रिपोर्ट भेजें, ताकि मुआवज़ा दिया जा सके।

ख़बरों के अनुसार 33% से ज़्यादा नुकसान पर ₹20,000 प्रति एकड़ मुआवज़े की बात कही गई, और इसमें बागवानी तथा गन्ने जैसी फसलें भी शामिल बताई गईं।

सबसे ज़्यादा प्रभावित ज़िले बताए गए — कपूरथला, तरनतारन, फिरोज़पुर और फाज़िल्का।

मुआवज़े की दर, शर्तें और समयसीमा सरकार के आदेशों से तय होती है और बदल सकती है। अपने ज़िले की मौजूदा स्थिति DC कार्यालय या तहसील से पुष्टि कर लीजिए।

गिरदावरी के समय आपके हक

यह हिस्सा लगभग कोई नहीं जानता, और यही सबसे काम का है।

पंजाब भू-अभिलेख नियमावली के अनुसार:

  • गिरदावरी शुरू करने से पहले पटवारी को गाँव के सरपंच और नंबरदार को सूचना देनी होती है — ताकि पता रहे कि किस दिन होगी
  • गाँव में चौकीदार के ज़रिए मुनादी कराई जानी चाहिए
  • खेत में जाते समय पटवारी को नंबरदार, सरपंच, पंचायत सदस्य या गाँव के प्रमुख लोगों को साथ ले जाना होता है
  • और entry पर उनके हस्ताक्षर लेने होते हैं

यानी गिरदावरी चुपचाप, अकेले में नहीं होनी चाहिए।

अगर आपके गाँव में मुनादी नहीं हुई, या पटवारी अकेले आया — तो यह आपत्ति का ठोस आधार है।

पता चले कि गिरदावरी होने वाली है, तो अपने खेत पर मौजूद रहिए। मौके पर खड़े होकर नुकसान दिखाना, बाद में अपील करने से कहीं आसान है।

entry गलत हो तो — अपील का हक

राजस्व विभाग के निर्देशों के अनुसार गिरदावरी की entry से आपत्ति होने पर संबंधित राजस्व अधिकारी की अदालत में अपील दायर की जा सकती है।

और एक बात जो जान लेनी चाहिए — विवादित ज़मीन की जोत के बारे में पटवारी खुद रिपोर्ट नहीं दे सकता। ऐसे मामलों में अपील का ही रास्ता है।

अपील करने से पहले ये जुटाइए

  • अपनी जमाबंदी और खसरा नंबर
  • नुकसान की फोटो — तारीख के साथ। मोबाइल से ली फोटो में तारीख अपने आप आ जाती है
  • गाँव के गवाह — सरपंच, पंच, पड़ोसी किसान
  • पिछले सालों की गिरदावरी — तुलना के लिए

अपनी जमाबंदी और खसरा नंबर jamabandi.punjab.gov.in से मुफ्त निकाले जा सकते हैं — घर बैठे, बिना पटवारी के।

e-गिरदावरी — अब रिकॉर्ड डिजिटल है

राजस्व विभाग ने e-गिरदावरी शुरू की है, जिसमें पटवारी मोबाइल ऐप से फसल का ब्योरा दर्ज करता है। पंजाब में 2.21 करोड़ से ज़्यादा खसरे इसमें आते हैं।

विभाग के अनुसार यह रिकॉर्ड नागरिकों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है, और गलत गिरदावरी की शिकायत ऑनलाइन भी दर्ज की जा सकती है।

अपने ज़िले में यह सुविधा कहाँ तक पहुँची है, यह तहसील या DC कार्यालय से पूछ लीजिए।

छोटे किसान सबसे ज़्यादा छूटते हैं

यह बात खुद सरकार के स्तर पर उठी है — कि पहले बड़े और प्रभावशाली ज़मींदारों को मुआवज़ा मिल जाता था, जबकि छोटे और सीमांत किसान छूट जाते थे।

इसीलिए इस बार रिपोर्ट को सरपंच, पंच और लंबरदार तक पहुँचाने की बात कही गई — ताकि हर कोई देख सके कि किसका नाम है और किसका नहीं।

यह सुविधा आपके लिए है। जाकर देखिए। अगर नाम नहीं है या रकबा कम दर्ज है, तो अभी बोलिए — मुआवज़ा बँट जाने के बाद नहीं।

ठेके पर खेती करते हैं तो

गिरदावरी में मालिक का नाम और जोतने वाले का नाम — दोनों दर्ज होते हैं।

अगर आप ठेके पर खेती करते हैं, तो देख लीजिए कि जोतने वाले के खाने में आपका नाम है या नहीं। यह अकसर छूट जाता है, और तब नुकसान आपका होता है पर मुआवज़ा कहीं और चला जाता है।

फसल बीमा लिया है तो

अगर आपकी फसल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना या किसी और बीमा में शामिल है, तो उसका दावा अलग रास्ते से जाता है — और अकसर ऐसे क्षेत्रों को विशेष गिरदावरी वाले मुआवज़े से अलग रखा जाता है।

दोनों की स्थिति अपने कृषि विभाग या बीमा कंपनी से साफ कर लीजिए — ताकि न दोनों का दावा छूटे, न दोहरा दावा करके अटक जाए।

अभी करने लायक चार काम

  1. सरपंच या लंबरदार के पास जाकर रिपोर्ट देखिए — आपका खसरा उसमें है?
  2. रकबा और नुकसान का प्रतिशत सही दर्ज है?
  3. गलत हो तो लिखित आपत्ति दीजिए और पावती लीजिए
  4. बैंक खाता आधार से seeded है — यह जाँच लीजिए, क्योंकि मुआवज़ा DBT से आता है

चौथा बिंदु हर सरकारी भुगतान में अटकाता है। npci.org.in पर पाँच मिनट में मुफ्त जाँचा जा सकता है — और यह मुआवज़ा मंज़ूर होने से पहले करा लेना चाहिए।

एक चेतावनी

  • गिरदावरी, आपत्ति और मुआवज़े की कोई फीस नहीं — किसी को पैसे मत दीजिए
  • “मुआवज़ा दिलवा देंगे” या “नाम चढ़वा देंगे” कहने वाला हर व्यक्ति ठग है
  • मुआवज़ा सीधे बैंक खाते में आता है, किसी के हाथ से नहीं
  • किसी लिंक पर आधार नंबर या OTP मत डालिए
  • ठगी हो जाए तो 1930 — पहला घंटा सबसे कीमती है

और याद रखिए — पंजाब में सेवा का अधिकार कानून लागू है। राजस्व से जुड़े काम तय समय में न हों तो अपील का हक आपके पास है।


स्रोत: राजस्व विभाग, पंजाब सरकार — गिरदावरी संबंधी निर्देश एवं पंजाब भू-अभिलेख नियमावली के प्रावधान; e-गिरदावरी संबंधी विभागीय जानकारी; विशेष गिरदावरी के आदेश एवं मुआवज़े संबंधी रिपोर्टिंग — द ट्रिब्यून; पंजाब लैंड रिकॉर्ड्स पोर्टल (jamabandi.punjab.gov.in)।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। मुआवज़े की दर, पात्रता और समयसीमा सरकार के आदेशों से तय होती है और ज़िले तथा आपदा के अनुसार अलग हो सकती है। अपने मामले के लिए तहसील, DC कार्यालय या कृषि विभाग से पुष्टि अवश्य करें। कोई त्रुटि दिखे तो vartalaapnews@gmail.com पर बताएँ।

निखिल कालिया

निखिल कालिया वार्तालाप के संपादक और प्रकाशक हैं। वे 2016 से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और जालंधर से पंजाब की स्थानीय खबरें कवर करते हैं — लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, चंडीगढ़ और पूरा राज्य। खबर, सुझाव या शिकायत के लिए संपर्क करें: vartalaapnews@gmail.com

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