क्रेडिट कार्ड की पेमेंट की तारीख निकल गई — और अगली सुबह से ही चिंता शुरू। कितना जुर्माना लगेगा? CIBIL खराब हो जाएगा?
इसके जवाब भारतीय रिज़र्व बैंक के मास्टर डायरेक्शन में साफ लिखे हैं। पर ये नियम बैंक खुद बताकर नहीं चलते, और हिंदी में इनके बारे में ज़्यादातर जो लिखा मिलता है वह या तो अधूरा है या पुराना।
पाँच नियम जो आपके काम के हैं।
1. तीन दिन तक लेट फीस नहीं लग सकती
यह सबसे कम जाना जाने वाला नियम है।
मास्टर डायरेक्शन के पैरा 9(ख)(v) के अनुसार — लेट पेमेंट शुल्क और इससे जुड़े दूसरे शुल्क तभी लगाए जा सकते हैं जब खाता तीन दिन से ज़्यादा बकाया (past due) रहे। क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी को “past due” की रिपोर्ट भी तभी जाती है।
यानी ड्यू डेट के अगले दिन पेमेंट कर दी, तो न लेट फीस बनती है और न ब्यूरो को रिपोर्ट जाती है।
ध्यान रहे: दिन स्टेटमेंट पर लिखी पेमेंट ड्यू डेट से गिने जाते हैं, स्टेटमेंट की तारीख से नहीं।
2. लेट फीस पूरे बिल पर नहीं — सिर्फ बची हुई रकम पर
मान लीजिए बिल ₹40,000 का था, आपने ड्यू डेट तक ₹35,000 भर दिए और ₹5,000 रह गए।
लेट फीस ₹5,000 पर बनेगी, ₹40,000 पर नहीं।
RBI ने 7 मार्च 2024 के संशोधन में यह बात और साफ कर दी — लेट पेमेंट शुल्क ड्यू डेट के बाद बची हुई रकम पर ही लगेंगे, “कुल देय राशि पर नहीं”।
स्टेटमेंट में अगर पूरे बिल पर शुल्क जुड़ा दिखे, तो वह सवाल पूछने लायक है।
3. ब्याज भी सिर्फ असली बकाया पर
उसी मार्च 2024 के संशोधन में एक नया उप-पैरा जोड़ा गया — 9(ख)(vi):
“ब्याज केवल बकाया राशि पर लगाया जाएगा, जिसमें भुगतान, रिफंड और पलटे गए लेनदेन (reversed transactions) का समायोजन किया गया हो।”
यानी अगर कोई लेनदेन वापस हो गया, या रिफंड आ गया, तो उस रकम पर ब्याज नहीं बन सकता। यह छोटी सी लाइन है, पर बिल में गड़बड़ पकड़ने के काम आती है।
4. ब्यूरो को बताने से पहले आपको बताना ज़रूरी है
यह सबसे ज़रूरी सुरक्षा है, और शायद ही किसी को पता हो।
पैरा 12 के अनुसार क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी (CIBIL, Experian, Equifax, CRIF) को डिफॉल्ट की रिपोर्ट भेजने से पहले कार्ड जारीकर्ता को आपको सूचित करना होगा। यह बोर्ड से मंज़ूर प्रक्रिया के तहत होता है।
और अगर रिपोर्ट चली गई, फिर आपने बकाया चुका दिया — तो भुगतान की तारीख से 30 दिन के भीतर बैंक को ब्यूरो में आपका स्टेटस अपडेट कराना होगा।
यह 30 दिन वाली बात याद रखिए। लोग बकाया चुकाकर भूल जाते हैं और महीनों बाद लोन लेते समय पता चलता है कि रिकॉर्ड अब भी डिफॉल्ट दिखा रहा है।
5. कार्ड बंद कराने में देरी पर बैंक आपको ₹500 रोज़ देगा
पैरा 8(क) — कार्ड बंद करने का अनुरोध सात कार्य दिवस में पूरा करना होगा, बशर्ते आपने सारे बकाया चुका दिए हों।
इसमें देरी हुई तो — “खाता बंद होने तक देरी के हर कैलेंडर दिन के लिए ₹500 का जुर्माना कार्डधारक को देय होगा”, बशर्ते खाते में कोई बकाया न हो।
यानी यह पैसा बैंक आपको देता है, आप बैंक को नहीं। कार्ड बंद कराने का अनुरोध लिखित में या रिकॉर्ड होने वाले माध्यम से कीजिए, और तारीख संभालकर रखिए।
जो गलत बातें फैल रही हैं
“RBI ने लेट EMI/पेमेंट का जुर्माना खत्म कर दिया।”
गलत। ऐसा कोई आदेश नहीं है। 2023 में RBI ने जो बदला था वह अलग बात है — लोन खातों में “penal interest” की जगह “penal charges”, और उन पर आगे ब्याज न लगाने का नियम। जुर्माना खत्म नहीं हुआ, उसका चक्रवृद्धि होना बंद हुआ। (लोन से जुड़ा एक और बदलाव 1 जनवरी 2026 से लागू हुआ है — फ्लोटिंग रेट लोन जल्दी चुकाने पर अब प्री-पेमेंट चार्ज नहीं।)
“Penal charges वाला नियम क्रेडिट कार्ड पर भी लगता है।”
नहीं। RBI के 18 अगस्त 2023 के Fair Lending Practice – Penal Charges in Loan Accounts परिपत्र के दायरे से क्रेडिट कार्ड साफ तौर पर बाहर रखे गए हैं। क्रेडिट कार्ड के लिए ऊपर वाला मास्टर डायरेक्शन लागू होता है — दोनों अलग हैं। जो लेख इन्हें मिला देते हैं, वे गुमराह करते हैं।
“Minimum Amount Due भर दिया तो सब ठीक है।”
सबसे महँगी गलतफहमी। MAD भरने से खाता डिफॉल्ट नहीं होता, पर ब्याज-मुक्त अवधि खत्म हो जाती है — RBI के अनुसार पिछले महीने का कोई बकाया रह जाए तो यह अवधि स्थगित हो जाती है, और ब्याज लेनदेन की तारीख से लग सकता है। RBI ने बैंकों को स्टेटमेंट पर यह चेतावनी छापना अनिवार्य किया है कि सिर्फ न्यूनतम रकम भरते रहने पर भुगतान महीनों-सालों तक खिंचता है।
शिकायत कहाँ करें
- पहले बैंक में — लिखित शिकायत दर्ज कराइए और शिकायत संख्या लीजिए
- 30 दिन में संतोषजनक जवाब न मिले — या जवाब ही न आए — तो RBI लोकपाल के पास जाइए
- शिकायत
cms.rbi.org.inपर ऑनलाइन दर्ज होती है — कोई फीस नहीं, वकील की ज़रूरत नहीं
मास्टर डायरेक्शन में यह 30 दिन की समय-सीमा खुद लिखी है। पहले यह एक महीना थी।
शिकायत के साथ स्टेटमेंट, पेमेंट की रसीद और बैंक से हुई बातचीत का रिकॉर्ड लगाइए। बैंक से जुड़े दूसरे मामलों में भी यही सीढ़ी काम करती है।
तीन काम जो आज कर सकते हैं
- ड्यू डेट का रिमाइंडर फोन में लगाइए — दो दिन पहले का। तीन दिन की छूट सुरक्षा है, आदत नहीं।
- ऑटो-डेबिट लगाइए — कम से कम न्यूनतम रकम का। भूलने से बचाव हो जाता है।
- पुराना बंद कार्ड जाँचिए — जो कार्ड इस्तेमाल नहीं करते, उसे बंद कराइए। बंद न हो तो ₹500 रोज़ का नियम याद रखिए।
और अगर किसी ने फोन पर “बैंक से बोल रहा हूँ, लेट फीस माफ करा देता हूँ” कहकर OTP या कार्ड की जानकारी माँगी — वह ठगी है। तुरंत 1930 पर, पहले घंटे में क्या करना है यहाँ पढ़िए।
इसी से जुड़ी जानकारी
- मिनिमम ड्यू भरने से ब्याज नहीं रुकता — और नए खर्च पर भी पहले दिन से लगने लगता है
- EMI बाउंस हो जाए तो कितना चार्ज और CIBIL पर क्या असर
- मुफ्त क्रेडिट रिपोर्ट और गलती सुधरवाने का तरीका — देरी पर मुआवज़ा भी मिलता है
स्रोत: भारतीय रिज़र्व बैंक — मास्टर डायरेक्शन, क्रेडिट कार्ड एवं डेबिट कार्ड – निर्गमन और आचरण निदेश, 2022 (पैरा 8, 9, 12, 26); RBI परिपत्र RBI/2023-24/132 दिनांक 7 मार्च 2024 — उक्त मास्टर डायरेक्शन में संशोधन; RBI परिपत्र दिनांक 18 अगस्त 2023 — Fair Lending Practice: Penal Charges in Loan Accounts (क्रेडिट कार्ड इसके दायरे से बाहर)।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, वित्तीय या कानूनी सलाह नहीं। शुल्क और ब्याज दरें हर कार्ड और बैंक के अनुसार अलग होती हैं — अपने कार्ड की MITC और स्टेटमेंट अवश्य देखें। नियम समय-समय पर बदलते हैं; नवीनतम स्थिति के लिए rbi.org.in देखें। कोई त्रुटि दिखे तो vartalaapnews@gmail.com पर बताएँ।